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जानकी पुल – A Bridge of World Literature

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vani tripathi

8 posts
पाथेर पांचाली: छोटी राह का गीत अब भी गूंजता है

पाथेर पांचाली: छोटी राह का गीत अब भी गूंजता है

September 3, 20251 mins0
सत्यजित रे की फ़िल्म ‘पाथेर पांचाली’ के सत्तर साल हो गये। इस महान फ़िल्म को याद कर…
  • स्तंभ वाणी त्रिपाठी
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चन्दन किवाड़ : जब किताब लोकगीत की तरह खुलती है

चन्दन किवाड़ : जब किताब लोकगीत की तरह खुलती है

August 3, 2025August 3, 20251 mins0
इस साल प्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी की किताब आई ‘चंदन किवाड़’, लोकगीतों की दुनिया को लेकर…
  • समीक्षा
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कान फ़िल्म फेस्टिवल: विस्तृत टिप्पणी

कान फ़िल्म फेस्टिवल: विस्तृत टिप्पणी

May 26, 2025May 26, 20252 mins0
वाणी त्रिपाठी अभिनेत्री रही हैं, फ़िल्म सेंसर बोर्ड की सदस्य रही हैं। जानकी पुल के लिए वह…
  • रपट
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पहलगाम: मेरी डायरी के पन्नों से

पहलगाम: मेरी डायरी के पन्नों से

April 27, 2025April 27, 20251 mins0
आज पढ़िए प्रसिद्ध संस्कृतिकर्मी वाणी त्रिपाठी के स्तंभ ‘जनहित में जारी सब पर भारी’ की अगली किस्त-…
  • लेख
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इंसान, तकनीक और रचनात्मकता के बीच संबंध

इंसान, तकनीक और रचनात्मकता के बीच संबंध

April 1, 20251 mins0
प्रसिद्ध संस्कृतिकर्मी वाणी त्रिपाठी ने अपने कॉलम ‘जनहित में जारी सब पर भारी’ में इस बार स्टूडियो…
  • लेख
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नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है?

नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है?

March 12, 20251 mins0
संस्कृतिकर्मी वाणी त्रिपाठी ने आज अपने स्तम्भ ‘जनहित में जारी, सब पर भारी’ में बाल साहित्य की…
  • Blog
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तमिलनाडु में हिन्दी विरोध की राजनीति

तमिलनाडु में हिन्दी विरोध की राजनीति

March 4, 20251 mins0
वाणी त्रिपाठी के स्तंभ जनहित में जारी सब पर भारी में आज पढ़िए तमिलनाडु में हो रहे…
  • लेख
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क्या अब व्यंग्य का मतलब सिर्फ लोगों को चौंकाना और उनसे प्रतिक्रिया लेना रह गया है?

क्या अब व्यंग्य का मतलब सिर्फ लोगों को चौंकाना और उनसे प्रतिक्रिया लेना रह गया है?

February 24, 20251 mins1
आज से हम एक नया स्तंभ शुरू कर रहे हैं- जन हित में जारी, सब पर भारी!…
  • लेख
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  • भारत पढ़ता है, लिखता है और शब्दों का उत्सव मनाता है
  • इरशाद ख़ान सिकंदर के कहानी संग्रह पर अशोक कुमार पांडेय
  • अरविंद मोहन की पुस्तक ‘यह जो बिहार है’ का एक अंश
  • अनुपम त्रिपाठी की पाँच कविताएँ
  • संजू शब्दिता की शायरी पर शारिक़ कैफ़ी

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  1. सफ़दर इमाम क़ादरी on प्रचण्ड प्रवीर का ‘अपना देश’
  2. Dr.Harpreet Kaur on आप मुझे देख सकते हैं? मुझे लगा मैं इनविज़िबल हूँ!
  3. Annana kumar Choubey on हिन्दी की छात्रा होने के नाते मुझे शर्मिंदगी है
  4. नीरज on हिन्दी की छात्रा होने के नाते मुझे शर्मिंदगी है
  5. अनूप शुक्ल on यात्रा वृत्तांत लिखना चाहते हैं तो इस लेख को ज़रूर पढ़ें
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