फ़िल्मकार अरण्य सहाय से आशुतोष कुमार ठाकुर की बातचीत

अरण्य सहाय फिल्मकारों की उस नई पीढ़ी से आते हैं, जो आज की ज़िंदगी को चलाने वाली उन अदृश्य व्यवस्थाओं…

ज़ालिम को जो न रोके वो शामिल है ज़ुल्म में

‘एक और द्रोणाचार्य’ (1977) शंकर शेष के इस नाटक की अंजलि नैलवाल ने बेहतरीन समीक्षा लिखी है। वे कुमाऊँ विश्वविद्यालय,…

लोकतंत्र, भाषा और डेमोगॉगस

दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी लक्की कुमार मिश्रा लोकतंत्र, भाषा, व्यवहार को लेकर एक बहुत ज्ञानवर्धक लेख लिखा है। पढ़ना चाहिए-…

रवीन्द्र रुक्मिणी पंढरीनाथ की कविताएँ

आज रवीन्द्र रुक्मिणी पंढरीनाथ की कुछ कविताएँ प्रस्तुत हैं। इन कविताओं का मराठी से हिन्दी अनुवाद उन्होंने स्वयं किया है…

नीतू गुजराल की पाँच कविताएँ

आज पढ़िए नीतू गुजराल की कविताएँ। नीतू गुजराल सोशल मीडिया के अलग अलग मंचों पर प्रकाशित हो चुकी हैं, कविताओं…

उदयन वाजपेयी की कहानी ‘दरवाज़ा’

पिछले दिनों वरिष्ठ लेखक उदयन वाजपेयी की कहानी ‘कथादेश’ में पढ़ी थी। एक वृद्ध लेखक को केंद्र में रखकर लिखी…

यात्रा: अतिरापल्ली से ऊटी

पश्चिमी घाट के जंगलों की यात्रा पर युवा लेखक साकेत बिहारी पाण्डेय का यह रोचक संस्मरण पढ़िए। साकेत ने हैदराबाद…

कैसे बनती है मातृभाषा: मृणाल पाण्डे

                  प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पाण्डे ने इस छोटे मगर सारगर्भित लेख में…

ऑस्कर पुरस्कार ने नये नियम और नई संभावनाएँ

हाल में ही प्रतिष्ठित ऑस्कर पुरस्कार ने अपने नियमों में बदलाव किए हैं। इस बदलावों का सिनेमा की दुनिया पर, ख़ासकर…

दिल्ली नालंदा डायलॉग 2026 का समापन: ज्ञान, संस्कृति और भविष्य की शिक्षा

दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित दो दिवसीय ‘दिल्ली नालंदा डायलॉग’ का कल समापन हो गया। दूसरे दिन के…

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Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी