इम्तियाज़ अली की फ़िल्में, ख़ासकर ‘मैं वापस आऊँगा’ देखकर आप भावनात्मक रूप से उद्वेलित हो जाते हैं। आप उस फ़िल्म…
Author: prabhat
केदार कानन: फूल बाबू का बंगला
आज आज हिन्दी-मैथिली के बड़े विजन वाले लेखक राजकमल चौधरी की पुण्यतिथि है। राजकमल के निधन के 59 साल हो…
पाठक की कहानी एक पाठक की ज़ुबानी
लोकप्रिय साहित्य पर हिंदी में अपेक्षाकृत कम गंभीर लेखन हुआ है, जबकि उसके पाठकों की दुनिया बेहद व्यापक, जीवंत और…
आचार संहिताओं का मूल्यांकन करती कविताएँ: हज़ारों निशान
पिछले जून जानकीपुल पर शिवांगी गोयल की कुछ कविताएँ प्रकाशित हुई थीं। और ठीक एक साल बाद शिवांगी अपने पहले…
‘विचार और वजूद’ लोक की जड़ों में रोपी गई जमीन की हकीकत
प्रसिद्ध लेखिका नूर ज़हीर के 2008 में प्रकाशित उपन्यास ‘बड़ उरैये’ के बहाने वैचारिकता के संघर्ष पर यह टिप्पणी लिखी…
एक पोटली में कितने दाने
हाल ही में आलोक कुमार मिश्र का कविता-संग्रह ‘पोटली के दाने’ प्रकाशित हुआ है। आज इस संग्रह की चर्चा…
मैं वापस आऊंगा: सरहद के उस पार, याद के इस पार
आज इम्तियाज़ अली की फ़िल्म ‘मैं वापस आऊँगा’ रिलीज़ हुई है। विभाजन की त्रासदी और इटरनल प्रेम की थीम को…
अभय के का ‘नालंदा’
प्रसिद्ध लेखक और राजनयिक अभय के की किताब ‘नालंदा: विश्व चेतना का उद्गम स्थल’ नालंदा को लेकर लिखी गई एक…
फ़ीफ़ा: पीठों पर लिखे राष्ट्र
कल यानी 11 जून से फुटबॉल का विश्वकप शुरू हो रहा है। इसी को लेकर लेखिका दीप्ति कुशवाह ने यह…
लेखक आख़िर लिखते कैसे हैं?
हर लेखक के लिखने का अपना अपना अन्दाज़ होता है। लेखिका वंदना यादव ने अपना अनुभव साझा किया है। आप…



