विश्वनाथ जी की कविताएँ

आज विश्वनाथ जी की जयंती है। विश्वनाथ जी ने आज़ादी के बाद भारत में पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने में बहुत काम किया। पॉकेट बुक्स क्रांति के अग्रदूतों में रहे। राजपाल एंड संज प्रकाशन के माध्यम से अनेक ऐसी किताबें प्रकाशित की जो सर्वकालिक महत्व की रहीं। यह बात कम लोग जानते हैं कि उन्होंने कविताएँ भी लिखीं। उनके तीन कविता संग्रह प्रकाशित हुए। दो हिन्दी में, एक अंग्रेज़ी में। आइये आज उनकी कुछ कविताएँ पढ़ते हैं- मॉडरेटर
====================

1

यह कौन
बैठा है जो मौन
कहीं मेरे भीतर

मौन है
फिर भी मुखर है निरंतर
कान धरे
सब सुनता है
सब पर टिप्पणी
करता है – निः शब्द
कभी-कभी ही सहमत
अधिकतर मुझसे
असहमत

2

दूसरों को छलने से पहले
तुम छलते हो
अपने आप को

झूठ दूसरों से नहीं
पहले
अपने आप से कहना पड़ता है

बलात्कार भी
पहले अपने मन
पर होता है

हत्या करने से पहले
आत्महत्या
हो जाती है

3

फूला नहीं समाता
फूल
अपने रूप-रंग पर
अपनी सुगंध पर
मकरंद पर

फूला नहीं समाता
व्यक्ति भी
अपने नाम-धाम पर
अपनी प्रतिष्ठा पर
अपनी सफलताओं पर

जितना बड़ा अहम
उतना बड़ा वहम

4

तन की नग्नता
को तो
ढांप लिया कपड़ों से
मन की नग्नता को ढाँपोगे
कैसे

मूर्ख को तो समझा भी लोगे
जैसे-तैसे
पर इस कुटिल बुद्धिमान
मन को समझा पाओगे
कैसे

5

मेरे हृदय में
बसा है मेरा देश

हृदय जब स्पंदन करता है –
हर्ष के अतिरेक में
तो लगता है
मेरे देश की धरती करवट ले रही है
मेरे देश में वसंत छाने वाला है
परंतु ऐसा कभी-कभी ही होता है

स्वतंत्रता की भोर हुए
आधी सदी हो चुकी है
फिर भी सोये रहने की आदत छूटी नहीं
मेरा हृदय अलसाया-सा रहता है
क्योंकि मेरे देश की तंद्रा टूटी नहीं

कब आएगा
मेरे हृदय में वसंत
कब होगा
देश की तंद्रा का अंत

6

दस्तक की आवाज़
“कौन हो भाई
चले आओ”

फिर दस्तक

“भाई, कौन हो तुम
अंदर चले आओ”
अंदर ही तो हूँ
कब से दस्तक दे रहा हूँ
तुम सुनो, तब न

जैसे समुद्र की
हर लहर
ढेरों रंग-बिरंगी सीपियाँ
बिखरा जाती है
लौटते हुए
रेत पर

उसी तरह ढेरों शब्द
बिखरा दी हैं
मेरी मनीषा ने
चारों ओर

उलझ गया हूँ
शब्दों की भीड़ में
परंतु
कहाँ है वह शब्द
जिसके बिना मेरा वाक्य अधूरा पड़ा है

More From Author

हरि मृदुल की कहानी ‘पटरी पर गाड़ी’

विनोद दूबे की कविताएँ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

जानकी पुल को सहयोग करें

Jankipul : A Bridge of World's Literature एक नयी शुरुआत! मेरा कॉलम #Jankipul के लिए " जनहित में जारी सब पर भारी" आपकी टिप्पणी की अपेक्षा रहेगी